Tuesday, 31 January 2012

जिदंगी के सफर में चले जा रहे है,

जिदंगी के सफर  में चले जा रहे है,
रास्ते में ना जाने कितने मुका आ रहे है,
कुछ जाने कुछ अनजान से मुकाम है,
और सफर की मंजिल से हम अब तक अनजान हैंे।
 कितने मोड आये,कितनी राहे बदल गयी,
 कितनी मंजिल आयी और आकर निकल गयी।
हम अब तक बस,सफर तय किये जा रहे हैं,
पर मंजिल का निशा अब भी हम कहा पा रहे है?
राहों पे चलते हुऐ मंजिले बदलती गयी,
हर राह पे एक नयी मंजिल बनती गयी।
                                                      तमन्ना

Saturday, 26 November 2011

but moon is alone in the sky


the sky is blue ,
and moon alonein the sky ,
stars are moving around it
but moon is alone in the sky….
 stars are twinkling ,
and close and open their eyes,
sky looks like blue sea ,
but  moon is alone in the sky…
the stars want to play with moon ,
they are try to make laugh to moon,
and they want that moon be happy ,
but moon feel alone in the sky….
stars look like lighten candle ,
and the sky look llike a temple,
but moon find the god and
moon is not happy…
 sky is looking like silent sea side ,
it give peace to people,
the child is happy to see the moon,
now moon is also happy ,
 bcoz of child smile,
now moon got the god ,
in the face of child…………



Wednesday, 23 November 2011

फूलों सी जिदंगी






काश ये जिदंगी सी फूलों सी बन पाती,
दूसरों को खुश्बू देकर महक पाती।
अपने लिए ना कोई चाह,ना कोई अरमान ,
दूसरों के नित होता है,उसका स्वाभिमान।
काश हम भी एक फूल की तरह जी पाते,
निज का स्वार्थ तज,दूसरों का हित कर पाते।
इन फूलों की क्या भी क्या जिंदगानी होती है,
हर एक जर्रा भी उनका उनसे बेगानी होती है।
तितलियों के लिए रंग ,भौरों को रस,
अर्थी हो या भगवान की मूरत ,दोनों के लिए है उसकी एक  ही सूरत
 किसी भी बात पर  ना गुमान ना अभिमान,
ना ही कोई खुशी ना ही रोष है
सब कुछ सह कर भी रहता खामोश।
काश हम ही इन फूलों की तरह रह पाते,
हर जगह बस अपने प्यार की खुश्बू बिखेरते जाते।

Wednesday, 12 October 2011


आज की रात बड़ी रूसवाई की है,
दो इश्के बफा की जुदाई की है।
 ये रात इस जॅहा से नजर चुरा रही है ,
दो इश्क के बांशिदोे पर कहर ढा रही है,
हर बीते लम्हे की यादे जहन में बस गई है।
मानो उन यादों से दिल की दुनिया झुलस रही हो।
कैसे भूल पाऐंगें वो लम्हे जो गुजारे साथ में ,
वादे किये जो उनसे ,हाथो को रख हाथ में ।
अब तो हर बात ,हर सांस में उनकी खुश्बू समाई है,
हर गुजरते लम्हे ने उसी की आश लगाई है।
दर्दे हिजरा लिये दिल यही पूछ रहा है,
ऐ खुदा बता ये तेरी कैसी खुदाई है।
इस दिल ने भी ना जाने,कैसी हसरत की है,
कैसे भूलेंगें उन्हे ,जिसकी इस दिल ने इबादत की है।
 बनकर बुत उनकी यादों को दफन कर लूंगी ,
सामा(सामान)समझ खुद को ,अजनबी के समन कर लूंगी।
ऐ खुदा मुझ पर तू इतनी रहम कर दे,
वो भूल जाए इस नाचीज को,इतना करम कर दें।
ये रात जिंदगी का,ऐसा फसाना बनेगी,
जिसे चाह कर भी जुबा दोहरा ना सकेगी ।
ना करना इस जिंदगी मे रूबरू उनसे ,खुदा,
ये नजर  उस नजर का तारूख ना कर सकेगी।

आज माँ को मैने जाना है जाना है






 
माँ तेरी कमी आज मुझे रूला रही है ,
दिल की गहराई से तुझे बुला रही है।
आज याद आ रहा है तेरा मुझे सहलाना
वो मेरी उदासी में मुझको बहलाना।
                                     हर एक पल मुझे ,तेरी याद दिला रहा है,
                                    और तेरे क्या है जीना ,मुझको अहसास करा रहा है।
                                    रोज शाम को मैस की रोटी ,जब थाली में आती है ,
                                     तब तेरे हाथो की बाटी,तेरी याद दिलाती है ।
घर पर तो खाना खाने में ,मै नखरे खूब बताती थी
और थोड़ा भी ठंड़ा खाना हो ,तो लाख बहाने गाती थी ।
तेरी छुई मुई सी बेटी ,अब पत्थर बन गई है मॉ,
और घर में कुछ ना करने वाली,अब सब कुछ कर रही है मॉ।
                                      घर में जब तू संग रहती थी ,तुझसे हर काम को कहती थी,
लड़ती थी झगड़ती थी और मन मर्जी से सब करती थी ।
जब परिक्षाऐं मेरी आती थी ,मै पढ़ते पढ़ते सो जाती थी ,
 

और रात को फिर हौले से तुम ,मेरी पुस्तक बंद कर जाती थी ।
अब भी पढ़ते पढते मै माँॅ
पुस्तक खोल के सोती हू,
जब नींद खुली मेरी तो फिर मैं, खुद ही पुस्तक बंद कर लेती हूॅ।              
जब तक तेरे साथ थी मै माँ ,तुझको जान पाई थी,
और तू कितनी प्यारी है माँ ,इसको पहचान ना पाई थी,
तुझसे दूर रहकर के मॉ ,तेरे साथ को जाना है,
और तेरे साये का सुख क्या है? अब मैने पहचाना है।



Tuesday, 27 September 2011

बारिश की बूंदे



बारिश की बूंदे कितनी प्यारी होती है,
जैसे किसी बगिया में बयारे होती है ।
हर किसी की अपनी अलग कहानी होती है,
किसी के लिए खुशियों का अहसास ,तो  किसी के लिए यादों के पैमाने होते है।
 
किसी बच्चे की मासूम ख्वाहिश होती है ,
तो जवा दिलों कि ये हसरत होती है ।
किसी बूढ़े के बीते दिनों कि याद होती है
और हर किसी के लिए इसकी अपनी कायनात होती है।
वैसे तो बारिश की बूंदे धरती पे नीर गिराती है ,
पर कही कही ये बूंदे मन में एक मीठा सा पीर दे जाती है।
धरती गीली,,मिट्टी सौंधी,पेडों में रस भर जाती है
बड़ा सुहाना लगता है ,जब बगिया प्यारी खिल जाती है।
कुछ भी मानो कुछ भी जानो ये बारिश बड़ी निराली है ,
पल मे शोला,पल मे शबनम, दिल को करने वाली है ।
ठहरे हुए मन में भी हलचल मचा देती है ,
कुछ भी कह दो पर ये बारिश तो बड़ा सुकू देती है।
 

Tuesday, 20 September 2011

जिंदगी से आज मेरी,मुलाकात हो गई ,



जिंदगी से आज मेरी,मुलाकात हो गई ,
कुछ देर बाते राहो में ,उसके साथ हो गई।
कुछ अटपटी, तो कुछ सीधी सी बात हुई ,
कुछ हैरानी, तो कुछ मुस्कुराहटे लाती हुई ।
कभी ये पहेली ,कभी सुलझी सी चकोर लगती है,
कभी जैसे पतंग में, उलझी हुई ड़ोर लगती है। 

कभी धूप कभी छाव ,हर रंग अपने दिखा दिये 
कभी पल में खुशिया तो कभी,दुनिया के सारे रंग दिखा दिये ।        
किसी से कुछ ना चाहो, इसी में सबसें बडी खुशी है ,
दूसरो को हसीं देना ही ,यही जिंदगी है
हर पल को अनमोल बनाने का ,फलसफा सिखा गई ,

एक छोटी सी मुलाकात में जीने का सलिका बता गई।